राजा  राम मोहन रॉय के राजनितिक विचार  एवं सामाजिक विचार 

राजा राममोहन राय को आधुनिक भारतीय चिन्तन का सिरमौर (जनक) नवजागरण का अग्रदूत, सुधार आन्दोलनों का प्रवर्तक, आधुनिक भारत का जनक, पुनर्जागरण का जनक एवं नव प्रभात का तारा आदि नामों से सम्बोधित किया जाता है।

सर्वप्रथम राजा राममोहन राय का ध्यान मूर्ति पूजा की ओर गया। मूर्ति- पूजा के स्थान पर शुद्ध पूजा का उन्होंने सदैव समर्थन किया है। श्रद्धा, विचार के प्रति उचित है मूर्ति के प्रति श्रद्धा से कोई लाभ नहीं।

राजा राममोहन राय ने जातीय भेदभाव और ऊँच- नीच की भावना का डटकर विरोध किया

जहाँ नारी की पूजा हो वहाँ देवताओं का वास बताया गया है परन्तु क्रूर और कामुक मुसलमानों के भारत में आने के उपरान्त यहाँ नारी की दशा हीन हो गई

राजा राममोहन राय ने सती प्रथा को बन्द कराने व अन्य कुरीतियों हेतु आन्दोलन छेड्ने का निश्चय कर लिया

अन्त में 4 दिसम्बर, 1829 ई० को वे अपने प्रयास में सफल हुए। लार्ड विलियम बैंटिक की सरकार ने सती प्रथा को अवैध तथा गैर कानूनी घोषित कर दिया