Test Examine

नेहरू युगीन भारतीय विदेश नीति

भारतीय विदेशी नीति को पं० नेहरू के मास्तिष्क की उपज माना जाता है। श्री नेहरू ने अपनी विदेश नीति में आदर्शवाद और व्यवहारवाद का सम्मिलित रूप प्रस्तुत किया था। तत्कालीन भारतीय स्थिति के अनुरूप श्री नेहरू ने गुट निरपेक्षता, अहस्तक्षेप, सह-अस्तित्व, शान्ति, सम्राज्यवाद तथा उपनिवेशवाद की विरोधी सम्बन्धी विदेश नीति को आत्मसात किया था। उनकी यह विदेश नीति पंचशील सिद्धान्तों पर आधारित थी। पं० नेहरू द्वारा अपनाई गई विदेश नीति … Read more

नेहरू के समाजवाद विचार

Nehru Socialism नेहरू जी ने समाजवाद की अपनी विचारधारा विकसित की। समाजवाद के इस आदर्श सिद्धान्त पर उनका आग्रह था कि आर्थिक स्वतन्त्रता के अभाव में राजनीतिक स्वतन्त्रता कोई मायने नहीं रखती। 1955 में अवाडी काँग्रेस अधिवेशन में नेहरु जी ने स्पष्ट किया कि उनका समाजवाद रूसी साम्यवाद का अन्य देशों के समाजवाद का अनुकरण (नक़ल) नहीं है। “समाज का अर्थ धन का वितरण नहीं है और न ही केवल जन कल्याणकारी राज्य … Read more

नेहरू के लोकतन्त्र सम्बन्धी विचार

Jawaharlal Nehru चिन्तन और अनुकरण एवं व्यवहार से लोकतन्त्रवादी विचारक के   थे। लोकतन्त्र को वे केवल राजनीतिक क्षेत्र में ही नहीं वरन् जीवन के प्रत्येक पहलू में लाना चाहते थे। वे प्रजातन्त्र में संसदात्मक पद्धति के समर्थक थे। उनका कहना था कि “हम संसदीय सरकार को इसलिए श्रेष्ठ मानते हैं कि यह समस्याओं को हल करने का एक शान्तिपूर्ण उपाय है। इस प्रकार की सरकार में वाद-विवाद, विचार-विमर्श और निर्णय करने की, और … Read more

धर्मनिपेक्षता पर नेहरु के विचार 

नेहरू जी धार्मिक कट्टरता के घोर विरोधी थे। आत्मा एवं परमात्मा के सन्दर्भ में विचार करने का उनके पास वक्त ही नहीं था। वे हिन्दू परिवार में जन्म लेने के बाद भी हिन्दू धर्म के पचड़े से दूरी बनाये रखा। वे सर्वधर्म समानता पर बल देते थे। पं० नेहरू ने इतिहास का गहन अध्ययन किया था। वे इतिहास के विकासवादी सिद्धान्त में पूर्ण आस्था रखते थे। भारतीय इतिहास के अध्ययन के … Read more