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भगवत गीता अध्याय 1 श्लोक 31 से 40 तक

न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे । न काङ्ग्रे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च ॥ ३१ ॥ हे कृष्ण ! इस युद्ध में अपने ही स्वजनों का वध करने से न तो मुझे कोई अच्छाई दिखती है और न, मैं उससे किसी प्रकार की विजय, राज्य या सुख की इच्छा रखता हूँ ।  तात्पर्य : यह जाने बिना कि मनुष्य का स्वार्थ विष्णु (या कृष्ण) में है, सारे बद्धजीव … Read more

GEETA GYAN SHLOK 21 SE 30

अर्जुन उवाच सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत । यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान् ॥ २१॥ कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिरणसमुद्यमे ॥ २२ ॥  अर्जुन ने कहा- हे अच्युत! कृपा करके मेरा रथ दोनों सेनाओं के बीच ले चलें जिससे मैं यहाँ उपस्थित युद्ध की अभिलाषा रखने वालों को और शस्त्रों की इस महान परीक्षा में, जिनसे मुझे संघर्ष करना है, उन्हें देख सकूँ। तात्पर्य : यद्यपि श्रीकृष्ण साक्षात् श्रीभगवान् हैं, किन्तु वे अहैतुकी कृपावश अपने मित्र … Read more

Geeta Gyan Shlok 11 se 20

हमारा उदेश्य है आप सभी तक भगवान् कृष्णा द्वारा दिया भगवत गीता ज्ञान आसानी से पहुच सके इस वजह से हमलोग रोजाना भगवत गीता का 10 श्लोक अपलोड करेंगे ताकि धीरे धीरे करके आप सभी लोग आसानी से पढ़ सके और गीता का ज्ञान आसानी से फैला सके …. धन्यवाद् अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः । भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि ॥ ११ ॥ अतएव सैन्यव्यूह में अपने-अपने मोर्चों पर खड़े … Read more