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स्वदेशी आन्दोलन के मूलभूत कारण

स्वदेशी आन्दोलन का सामान्य परिचय भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के इतिहास में बीसवीं शताब्दी की शुरुआत स्वदेशी आन्दोलन के साथ हुई। इस आन्दोलन ने भारतीय राष्ट्रवाद को एक नूतन शक्ति एवं दिशा प्रदान की। आन्दोलन महज राजनीतिक दायरे तक ही सीमित नहीं था अपितु इसने साहित्य, संगीत, कला, विज्ञान, उद्योग तथा जीवन के विविध क्षेत्रों को भी प्रभावित किया। समाज का प्रत्येक वर्ग स्वदेशी आन्दोलन से जुड़ गया। स्वदेशी आन्दोलन के … Read more

UPSC & State-PCS Mock Test 8 – भारत का संवैधानिक विकास Part 4

यह Mock Test UPSC & State-PSC की तयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए है , इस टेस्ट के तहत PYQ के 30000 तीस हज़ार प्रश्नों को हल करेंगे, और इसका PDF आप लोगे Telegram से Download कर सकते है | Test को प्रारंभ करने के लिए Start पर क्लिक करे . Subscribe YouTube Channel Subscribe Join Whatsapp Join Now Join Telegram Join Now Join Facebook Page Join Now 1. भारत … Read more

UPSC & State-PCS Mock Test 7 – भारत का संवैधानिक विकास Part 3

यह Mock Test UPSC & State-PSC की तयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए है , इस टेस्ट के तहत PYQ के 30000 तीस हज़ार प्रश्नों को हल करेंगे, और इसका PDF आप लोगे Telegram से Download कर सकते है | Test को प्रारंभ करने के लिए Start पर क्लिक करे . Subscribe YouTube Channel Subscribe Join Whatsapp Join Now Join Telegram Join Now Join Facebook Page Join Now 1. भारतीय … Read more

UPSC & State-PCS Mock Test 6 – भारत का संवैधानिक विकास Part 2

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यह Mock Test UPSC & State-PSC की तयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए है , इस टेस्ट के तहत PYQ के 30000 तीस हज़ार प्रश्नों को हल करेंगे, और इसका PDF आप लोगे Telegram से Download कर सकते है | Test को प्रारंभ करने के लिए Start पर क्लिक करे . Subscribe YouTube Channel Subscribe Join Whatsapp Join Now Join Telegram Join Now Join Facebook Page Join Now 1. सूची-1 … Read more

UPSC & State-PCS Mock Test 5 – भारत का संवैधानिक विकास

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यह Mock Test UPSC & State-PSC की तयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए है , इस टेस्ट के तहत PYQ के 30000 तीस हज़ार प्रश्नों को हल करेंगे, और इसका PDF आप लोगे Telegram से Download कर सकते है | Test को प्रारंभ करने के लिए Start पर क्लिक करे . Subscribe YouTube Channel Subscribe Join Whatsapp Join Now Join Telegram Join Now Join Facebook Page Join Now 1. किस … Read more

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के कारण

इण्डियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना आधुनिक भारतीय इतिहास की एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण घटना है। इसकी स्थापना से पूर्व भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन का स्वरूप असंगठित अस्पष्ट और अल्प प्रभावक था। राष्ट्रीय शक्तियाँ विश्रृंखलित थी और राष्ट्रीय स्त्र पर राष्ट्रीयता नहीं प्रकट हो रही थी परन्तु कांग्रेस की स्थापना ने सर्वप्रथम स्वतंत्र राष्ट्र के निर्माण की अवधारणा प्रस्तुत की, राष्ट्रीय शक्तियों को समान उद्देश्य के लिए एकत्र किया गया था और भारत … Read more

सामान्य ज्ञान “भारतीय राजव्यवस्था” Test 2

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सामान्य ज्ञान “भारतीय राजव्यवस्था” जो की आपके प्रतियोगी परीक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान करता है | Test को प्रारंभ करने के लिए Start पर क्लिक करे . Subscribe YouTube Channel Subscribe Join Whatsapp Join Now Join Telegram Join Now Join Facebook Page Join Now PDF Download करने के लिए Telegram Join करे या पोस्ट के अंत में जाये | 1. भारतीय संविधान के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति किसमें निहित … Read more

सामान्य ज्ञान “भारतीय राजव्यवस्था” Test 1

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सामान्य ज्ञान “भारतीय राजव्यवस्था” जो की आपके प्रतियोगी परीक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान करता है | Test को प्रारंभ करने के लिए Start पर क्लिक करे . Subscribe YouTube Channel Subscribe Join Whatsapp Join Now Join Telegram Join Now Join Facebook Page Join Now PDF Download करने के लिए Telegram Join करे या पोस्ट के अंत में जाये | 1. संविधान सभा की प्रथम बैठक कब हुई थी? (a) 9 … Read more

बाल गंगाधर तिलक के राजनीतिक विचार

बाल गंगाधर तिलक राजनीतिक चिन्तन में एक यर्थाथवादी राजनेता की भूमिका अदा की। उनके चिन्तन एवं दृष्टिकोण में हमें यथार्थवाद का तत्त्व दृष्टिगत होता है, परन्तु वे मैकियावेली और थामस हाब्स के सदृश तो यथार्थवादी नहीं थे और न ही उन्होंने, प्लेटो, अरस्तू के सदृश सर्वोत्तम राज्य के लक्षणों और सम्भावना का विवेचन ही किया। जीवन में उनका मूल उद्देश्य भारत की राजनीतिक दासता से छुटकारा प्राप्त करना था इस … Read more

दयानन्द स्वरस्वती के राजनीतिक विचार

स्वामी दयानन्द सरस्वती जी राजनीतिक विचारकों की भांति राजनीतिक सिद्धान्तों की व्याख्या नहीं की लेकिन देश की राजनीतिक परिस्थियों के प्रति वे पूर्णतः सजग थे। समय – समय पर उन्होंने अपने भाषणों तथा लेखों में तथा अपने ग्रन्थ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ में राजनीतिक के सम्बन्ध में जो कुछ कहा और लिखा उसी को सामूहिक रूप से उनका राजनीतिक चिन्तन कहा जा सकता है। उनके प्रमुख राजनीतिक विचारों को अग्रलिखित शीर्षकों के … Read more