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प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध (1766-69)

बंगाल में अपनी सुगम सफलता के पश्चात्, स्वाभाविक रूप से अंग्रेज अपनी सैन्य शक्ति को लेकर थोड़ा आश्वस्त हो गए और आस-पास के क्षेत्रों में विस्तार करना शुरू कर दिया। प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध अंग्रेजों की आक्रामक नीति का परिणाम था। उन्होंने हैदराबाद के निजाम (1766) के साथ संधि की, और उसे अंग्रेजों को उत्तरी सरकार का क्षेत्र देने के लिए मनाया जिसके बदले में उन्होंने उसकी हैदर अली से सुरक्षा प्रदान … Read more