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Short Motivetional Story in Hindi – बिल्ली मत पालो – यह कहानी आपको बुरी आदतों से बचाएगा ।

Short Motivetional Story in Hindi – बिल्ली मत पालो – यह कहानी आपको बुरी आदतों से बचाएगा-

एक समय की बात है एक गांव में एक विद्वान संत अपने शिष्य के साथ रहता था। जब वह संत मरने ही वाला था तब उसने अपने शिष्य के कानों में कहा, बेटा मेरी इस बात को हमेशा याद रखना की जीवन में कभी भी बिल्ली मत पालन शिष्य हैरान रह गया इससे पहले वह कुछ पूछ पाता संत चल बसे, अब वह शिष्य दिन-रात इसके बारे में सोचने लगा कि गुरु जी ने मुझे ऐसा क्यों कहा और भला मैं बिल्ली क्यों का पालू पर शिष्य जानता था कि उसके गुरु विद्वान थे और उनके द्वारा कहे गए शब्दों के गहरे मतलब होते थे। एक दिन उसे अपने गुरु के मित्र का स्मरण हुआ शिष्य उनसे मिलने गया और उन्हें अपने गुरु की बिल्ली ना पालने वाली अंतिम उपदेश बताई और उसका अर्थ पूछा संत मुस्कुराए और कहा आपके गुरु ने कुछ शब्दों में ही जीवन का पूरा सार कह दिया है। मेरे गुरु ने भी मारते हुए मुझे यही उपदेश दिया था पर मैं मूर्ख इसका अर्थ समझ नहीं पाया और अपना जीवन बर्बाद कर लिया आज मैं इसका अर्थ तुम्हें समझता हूं तुम इसे बड़े ध्यान से सुना जब मेरे गुरु ने मुझे बिल्ली ना पालने का अंतिम उपदेश दिया था तब मैंने उसे व्यर्थ की बात समझ लिया और कभी उसका अर्थ जानने की कोशिश नहीं किया फिर जब मैं संसार का त्याग कर अपना सन्यास जीवन प्रारंभ करने के लिए वन में निवास करने लगा तभी इसकी शुरुआत हुई वन में मेरे निवास स्थान के पास एक गांव था। जहां मैं भिक्षा मांगने जाता था जब मैं भिक्षा मांगने के लिए जाता था तब चूहे मेरे कपड़ों को कुतर देते थे। एक संन्यासी होने के कारण मेरे पास सीमित कपड़े थे मैं गांव वालों से इसका समाधान पूछा तो उन्होंने कहा एक बिल्ली पाल लो वह चूहे को आपके निवास स्थान से दूर रखेगी मुझे गांव वालों का सुझाव अच्छा लगा और मैं बिल्ली पाल ली बिल्ली पालने से चूहे तो भाग गए पर अब मुझे उसके लिए दूध की व्यवस्था करनी पड़ती थी। अब मैं भिक्षा के साथ-साथ गांव वालों से दूध भी मांगने लगा गांव वालों ने कहा हम रोज-रोज आपको दूध नहीं दे सकते इससे अच्छा है आप गाय पाल लो मुझे गांव वालों का सुझाव अच्छा लगा और मैं गाय भी पाल लिया गाय पालने से दूध की समस्या तो खत्म हो गई पर अब मुझे बिल्ली के साथ-साथ गाय का भी देखभाल करना पड़ता था उसके लिए घास की व्यवस्था करनी पड़ती थी क्योंकि मेरे निवास स्थान के आसपास घास नहीं होते थे। अब मैं भिक्षा के साथ-साथ गांव वालों से घास भी मांगने लगा फिर गांव वालों ने मुझे जो सलाह दी उसी ने मुझे बर्बाद कर दिया गांव वालों ने कहा हमारे गांव में एक विधवा महिला है वह संतों का बड़ा सम्मान करती है। आप उनसे सहायता मांगे वह आपके निवास स्थान के आसपास घास भी उग देगी बदले में आप उसे दो रोटी खाने को दे देना मुझे गांव वालों का सुझाव अच्छा लगा और मैंने उसे विधवा महिला से सहायता मांगी अब वह महिला बड़ी सेवा भावी और परिश्रमी थी उसने मेरे निवास स्थान के आसपास घास तो उगाई ही साथ में मेरे खाने के लिए अनाज भी उगाने लगी वह मेरी बिल्ली और गाय का भी देखभाल करने लगी वह महिला जवान और सुंदर थी मुझे उससे प्रेम हो गया और हमने विवाह कर लिया एक साल बाद हमारा बच्चा भी हो गया तब मैं सन्यासी नहीं रहा लोगों ने मुझे ठरकी कहकर संबोधित किया और भिक्षा देने से मना कर दिया और अब मुझे अपने परिवार के रोजी-रोटी के लिए दर-दर भटकना पड़ता हैआपके गुरु ने कहा कि बिल्ली मत पालन यहां बिल्ली ना पालने का अर्थ मन को छूट न देने से है मेरी इस कहानी में गांव वाले मन का प्रतीक है। जिस प्रकार मन हमें तरह-तरह का प्रलोभन देता है उसी प्रकार गांव वालों ने भी मुझे कभी बिल्ली कभी गाय तो कभी स्त्री रखने का प्रलोभन दिया अगर मैंने पहले प्रलोभन को ही ठुकरा दिया होता अर्थात बिल्ली नहीं पाली होती तो आज मेरी यह दुर्दशा नहीं होती दोस्तों हमारे जीवन में किसी भी प्रकार का लत हो चाहे वह बीड़ी हो सिगरेट हो शराब तंबाकू या ड्रग्स हो सब मन को देने वाले छुट का ही परिणाम है। हमारा मन हमें कहता है बस एक बार ट्राई करो उसके बाद दोबारा कभी मत करना ट्राई करने के बाद हमें उसे काम में आनंद और फिर हमें इसकी लत लग जाती है दोस्तों इसलिए मन के पहले प्रलोभन को ही शक्ति के साथ ठुकरा दो दूसरे शब्दों में कहूं तो बिल्ली मत पालो कृपया इस कहानी को अपने बच्चों और करीबियों के साथ अवश्य शेयर करें और उन्हें बिल्ली पालने से बचाए ।

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