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Motivetional Story – ईंट ढोने वाला कैसे 5 बार फेल होकर UPSC निकाला

गरीब किसान मजदूर के घर सन 1990 में एक पुत्र का जन्म होता है घर वाले बेटे का नाम गनपत रखते हैं | और हम इनके जीवन के उन संघर्षो को पढेंगे जिससे हम Motivate हो सके और जानेंगे की कैसे यह UPSC Exam को पास किया |

ganpat krishna yadav

गनपत के दो और बड़े भाई थे घर पर गरीबी के कारण इन लोगों की पढ़ाई सरकारी स्कूल से ही हुई |गनपत सात साल की उमरा से ही अपने पिता के गरीबी दूर करने की चाहत में पिता के साथ इट भट्टे पर काम करने के लिए जाते थे, लेकिन गनपट की उमर कम होने की वजह से वहां पर काम करने की इजाजत नहीं होती थी

इसके बाद इन्होने गांव के ही एक मुंगफली मिल में काम करने के लिए गांव के बच्चों के साथ जाने लगे सुबह 5:00 बजे उठ जाना 7:00 बजे पहुचना, सुबह से शाम पेड़ की आधी अधूरी छाव में मुंगफली के दाने निकलना वह भी मुंह से फोड़ाना होता था दिन भर बैठे बैठे दर्द के मारे कमर लगता था टूट गई है | फिर भी इतनी कम उम्र में कम पर जाना और दिन भर का ₹5 मिलता था और वह 5 रूपया माँ के हाथों में देकर बहुत खुशी मिलती थी इस तरह बचपन से ही संघर्षों में जीवन काटता है |

गणपत की स्कूली शिक्षा

गणपत की पढ़ाई प्राइमरी की पढ़ाई सरकारी स्कूल से हुई दसवीं तक की भी पढाई सरकारी ही स्कूल से हुई | जब यह जिले में 89.83% के साथ दूसरे टॉपर हुए तो आगे की पढ़ाई के लिए इनको जयपुर भेजा गया 11वीं 12वीं जयपुर से किया और यहां पर भी टॉपर रहे पर यहां पर जाने से पहले जब दसवीं पास किया तो इनको पिता इनकी शादी करा दिए हाथों में मेहंदी लगाए हुए जब शहर के स्कूल में पहुंचे तो वहां के बच्चे बहुत चिढाते थे |और तो और इनके नाम गणपत की वजह से भी चिढाते थे क्योंकि उसी समय एक गाना आया था गणपत चल दारू ला तो इस तारिके से स्कूल में चिढाते थे अब जैसे तैसे करके 11वीं 12वीं भी पास कर ली और टॉपर भी रहे अब आगे की पढाई के लिए बी.टेक करना था इसके लिए बी.टेक का प्रवेश परीक्षा दिया वहां भी पास कर लिया आईआईटी मुंबई मिल रहा था पर घर के करीब रह कर घर वालों को सपोर्ट करना चाहते थे इसी वजह से घर से दूर नहीं गए और MNIT Jaipur में addmission लिया कॉलेज शुरू हो गया कॉलेज जाना पढ़ना इसी तराह-करते कॉलेज के अन्त्तिम साल भी आ गया था अब कॉलेज में प्लेसमेंट के लिए कंपनी आई और इनका कॉलेज प्लेसमेंट भी हो गया घर वाले बहुत खुश हुए लड़के की नौकरी लग गई |

अब जो लड़का 7 साल की उम्र में अपने माँ को ₹5 दिया करता था अब वह लड़का अपनी माँ को 50 हज़ार महीने का दिया करता है कुछ समय तक नौकरी की पर इनका मन नहीं लगता था इस नौकरी के काम में

जीवन का निर्णायक मोड़

ganpat krishna yadav

गणपत का अपनी नौकरी में मन नहीं लगता था उसका सपना था अपने लोगों के लिए कुछ ऐसा करना जिससे गांव के लोगों की गरीबी दूर हो सके इसी गरीबी को दूर करने के लिए गणपत ने एक राज तिलक के नाम से किताब लिख दिया था… किताब में अपना है पूरा प्लान लिख कर तैयार किया था और इस प्लान पर वह काम करना चाहता था इस किताब को पढ़ने के लिए अब खरीद सकते हैं |

अब अपनी नौकरी छोड़ना चाहते हैं ताकि वह अपने प्लान पर काम कर सकें जब उन्हें घर वालों को यह बात बताई जाए कि मैं अब नौकरी छोड़ने वाला हूं तो घर वाले सीधे-सीधा मना कर दिए कि नौकरी नहीं छोड़नी है | अब वह अपने दोस्तों से बात किया अपने दोस्तों को बताया कि मैं इस तारिके से काम करना चाहता हूं तो दोस्तों ने उनको कहा कि नौकरी मत छोड़ो नौकरी बहुत मुश्किल से मिलती है सब की बात सुनाने के बाद गणपत ने खुद ही फैसला कर लिया कि अब मैं आपको नौकरी छोड़ना चाहता हूं, और मैं अब अपने प्लान पर काम करूंगा… इसके बाद 2015 में नौकरी छोड़ दी नौकरी छोड़ने के बाद अपने घर आ गए घर आने के बाद जो उन्हें किताब लिखी थी उसे अपने गांव में ही 5 सितंबर 2015 को पब्लिश कर दिया बुक पब्लिश होने के बाद इनको लगता था कि लोग किताब इनकी पढ़ेंगे लोगों में बदलाव आएगा साथ देंगे और इनके प्लान पर इनके विचार पर वह काम करेंगे ताकि लोगों का साथ-साथ विकास हो सके इस विचार से उन्होंने 3 से 4 महीने तक सबका इंतजार किया पर लोग आते नहीं इसके पक्ष में फैसला किया कि मैं अब लोगों के पास जाउंगा जब वह लोगों के पास जाते और अपनी योजना बनाएं तो लोग उनको बहुत आश्रय से देखेंते कि तू यह खेती करने के लिए यहां आया है तो नौकरी छोड़ कर खेती करेगा तू वहां नौकरी करता भी था या नहीं करता था नौकरी करता था तो नौकरी को क्यों छोड़ा तूने ऐसे ऐसे सवाल लोगों ने उनसे करना शुरू कर दिया इन सब के बाद फैसला किया कि अब मैं खुद से अपने प्लान पर काम करूंगा और मैं खुद से यह सारा काम पूरा करूंगा |

किराए पर लिया ज़मीन

ganpat krishna yadav

जब उनको निर्णय कर लिया कि अब मैं खुद से ही अपने इस प्लान पर काम करूंगा तो उन्हें अपने एक दोस्त की मदद से खेती करने के लिए जमीन किराये पर लिया ताकि वहां पर जैविक खेती कर सके और इस खेती को एकीकृत बनाना चाहता थे ।

नौकरी तो इन्हें छोड़ दी थी तो घर की स्थिति थोड़ा बदहाल होने लगी तो भैया ने कोचिंग पढ़ना शुरू किया था | भैया ने इनको कहा कि तुम भी मेरा साथ दो ताकि घर की स्थिति थोड़ा और सुधार सके |

इस दौरन इनके जीवन में बहुत से चलेंगे आने लगे थे गांव के लोग ताना मारना शुरू कर दिए थे गांव वाले सब कुछ जानते थे फिर भी घर पर माँ से भाई से आकार पूछते थे कि तुम्हारा भाई तुम्हारा बेटा क्या कर रहा है घर वालों का मुंह बना का बना रह जाता था कुछ बता नहीं पाते थे घर वालों को लगता था कि मेरा बेटा बहुत इंटेलिजेंट है | कुछ तो बड़ा अधिकारी, डीएम, एसडीएम बनेंगे ही पर इनके इस काम से गांव वाले के द्वारा इस तरह से घर पर माँ से भाई से बार-बार पूछे जाने के बाद घर वाले ढांग से बात भी नहीं करते गनपत को बहुत बुरा लगता था | तब सोचने लगे कैसे मैं इसको ठीक करूं तो इन्होने फैसला किया कि मैं पढ़ने के साथ-साथ पढ़ना भी शुरू करूँगा

यूपीएससी (UPSC) की यात्रा

गनपत ने फैसला कर लिया है कि यूपीएससी का एग्जाम दूंगा , जबकी इनको अभी यूपीएससी के एग्जाम पैटर्न के बारे में पता भी नहीं था तब अपने कॉलेज के दोस्त से जो यूपीएससी में सिलेक्ट हुआ था| उससे एग्जाम के बारे में जानकारी प्राप्त की , सिलेबस पैटर्न का पता किया । इन्होनें पूछा फॉर्म कब आता है उसी समय फॉर्म आया हुआ था तो दोस्त के द्वार फॉर्म भरवा दिए

परीक्षा देने गए

यूपीएससी परीक्षा के प्रीलिम्स की तारीख आ गई थी और इनको अभी भी कुछ खास जानकारी नहीं थी, और ना ही इनकी अच्छे से कोई पढाई हुई थी बस यह परीक्षा पैटर्न पेपर पैटर्न देखने के लिए परीक्षा देने चले गए थे |और पेपर इनको ठीक-ठाक समझ आया इन्होने बी.टेक किया हुआ था तो सी सेट को बहुत अच्छी तरीके से क्लियर कर लिया पर जी एस में फेल हो गए, फेल होने के बाद अब अगले साल की तैयारी में जुट गए थे और एक ही रूटीन फॉलो करते रहना पढ़ना पढाना चलता रहा फिर से फॉर्म आया अप्लाई हुआ परीक्षा की तारीख आ गाई परीक्षा देने भी चले गए पर इनकी पढ़ाई में थोड़ी कमी रह गई थी जितना पढ़ना चाहिए था उतना नहीं पढ़ा था दूसरे प्रयास में भी फेल हो गए|

अब घर वालों का प्रेशर क्रिएट होने लगा था दो बार एग्जाम में फेल होने के बाद घर गांव रिश्तेदार सबके ताने सुनाते रहे तब इनको लग गया की अब सीरियस पढ़ना पड़ेगा ये यूपीएससी कोई हलवा नहीं है इस तरह से निकल जाए सब कुछ अपने पढ़ने पढाने का टाइम टेबल तैयार किया पर टाइम टेबल को बहुत मुस्किल से ही लोग फॉलो कर पाता है यहीं इनके साथ भी हुआ ये भी फॉलो नहीं कर पाए | और तो और इनकी एक और गलती थी जब यह कुछ भी पढ़ते थे तो उस टॉपिक पर पीएचडी करने लगते थे क्यों हुआ इसका समाधान क्या है समाधान के चक्कर में ये डायवर्ट हो जाते हैं यहां तक कि यूपीएससी पर फोकस ही नहीं कर पाते थे घर के प्रेशर से यह अलग-अलग फील्ड में भगाने लगते थे कहीं रेलवे तो कहीं और तब तक 2019 वाला भी यूपीएससी प्रीलिम्स आ गया था याह वाला भी एग्जाम दिया जिसमें भी फेल हो गए घर वालों को अब लग गया कि यह अब आईएएस में कुछ नहीं कर पाएगा |

घर वालों का मोटिवेशन

बेटे की लगतर तीन कोशिश असफल होने के कारण बेटे की चिंता बढ़ाने लगी एक तो खुद दुखी है मैं भी दुखी हूं अब हां क्या करेगा कोई धंधा बिजनेस भी नहीं है कि कुछ कर ले मन को चिंता और सताने लगी भगवान से दुआ मांगने लगी मंदिर मंदिर जाने लगी माँ ने कहीं से भभूत लिया बेटे गणपत को दिया बोली बेटे इस बार पास हो जाएगा और माँ को विश्वास दिलाया कि इस बार पक्का पास हो जाऊंगा मन लगा कर पढ़ूंगा पर माँ ने बोला कि बेटा दिल्ली जा वहां से पढाई कर ले पर इन्होने घर से ही पढ़ते हुए 2020 की भी परीक्षा दीया पूरी मेहनत लगन सबसे लड़ते हुए 2020 की परीक्षा दीया और फिर से फेल हो गए और फेल होने की वजह से यह पूरी तरह से टूट गए हालात बहुत गंभीर हो गयी सभी लोग पूछने लगे की नौकरी कब लगेगी यहां तक कि इनकी खुद की बेटी पूछने लगी कि पापा नौकरी कब लगेगी और कुछ लोग मिलते तो पूछते कि अब तक प्रीलिम्स भी नहीं हुआ | फिर गनपत ने निर्णय लिया एक बार और परीक्षा दूंगा 2021 वाला भी 2021 वाला भी फॉर्म अप्लाई हो गया परीक्षा दीया और इस बार सफलता हाथ लग हाय गाई प्री क्लियर कर लिया घर पर सभी लोग खुश थे | मा ने कहा बेटा तू जयपुर चला जा 3-4 महीने के लिए जब तक तेरा मैन्स नहीं हो जाता यहां रहेगा टेंशन लेगा तो अपनी पढ़ाई और अच्छे से नहीं कर पाएगा अपनी पत्नी और बेटी के साथ जयपुर आ गए और अपने जीवन के सर्वश्रेष्ठ मेहनत इस मैन्स के लिए कर रहे सिलेबस पूरा करने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे सिलेबस पूरा करते-करते मैन्स की डेट आ गयी इन्होने मैन दीया कुछ माहीने बाद मेन्स का रिजल्ट आया मेन्स मैं फेल हो गए इस फेल होने से इनको बहुत आहट हुआ बहुत रोए अब इनसे कोई भी इनके रिजल्ट के बारे में पूछता हूं तो इनका बहुत रोना आता था घर पर भी बहुत रोते थे इनके भाई माँ पिता जी इनको मोटिवेट किये बेटा फिर से एग्जाम दे तू पहले प्री में फेल हुआ था फिर मेहनत किया तो पास हुआ वैसे ही मैन्स में भी पास हो जाएगा तू मेहनत कर तो फिर से एग्जाम दे ने के लिए हिम्मत जुटाकर इन्होने अगले साल के लिए फिर से मेहनत करनी शुरू कर दी और फॉर्म की डेट आ गाई फॉर्म भर दिए परीक्षा भी दी और इस बार प्री क्वालिफाई हुआ मेंस आया मेंस के लिए दिल्ली आ गए दृष्टि आईएएस मेंटर क्लास जॉइन किया फ्री वाली और यहां फ्री में प्रश्न मॉक टेस्ट दिया एक ही मंथ में इनको घर की याद सताने लगी तो यहां से यह घर वापस आ गए और फिर से से वही जयपुर गए बीवी और बेटी के साथ मैन्स के लिए तैयारी शुरू की इनकी पत्नी इनके हर मोड़ पर साथ दिया यहां तक परीक्षा केंद्र तक साथ जाती थी मैन्स की परीक्षा खत्म हुआ कुछ महीनो के इंतजार के बाद नतीजा आया मैन्स भी इस बार क्लियर हो गया घर में खुशियों की लहर दौड़ गयी अभी भी एक पड़ाव इंटरव्यू का बाकि था पर गनपत को अपने ऊपर भरोसा था कि इंटरव्यू कर ले जाउंगा पर घर वाले के दबाव के कारण दिल्ली फिर से आए दृष्टि आईएएस में इन्होने मोक्क इंटरव्यू दिया और मॉक टेस्ट में ठीक-ठाक इनका प्रदर्शन रहता था अब इंटरव्यू की तारीख गाई इंटरव्यू दिया इनको भरोसा था |इंटरव्यू देने के बाद अब इनको भरोसा था कि अब मेरा इंटरव्यू अच्छा हुआ है कुछ महीनो बाद फाइनल लिस्ट आने वाली थी सब बेचैन बैठे मन किसी का नहीं लग रहा था लिस्ट आ ही गाई लिस्ट में नाम देखा तो 665 रैंक मिल गई रिजल्ट देख घर में उत्सव मन्ने लगा रिश्तेदार गांव दोस्त जो लोग थे सब इनको बधाई देने लगे यहां तक कि जो लोग ताने मरते थे अब वो भी बधाई दे रहे थे |

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